Monday, May 27, 2013

मारीशस से प्रकाशित पत्रिका 'विश्वहिंदी पत्रिका' का नया अंक

विश्व हिंदी पत्रिका
पत्रिका : विश्व हिंदी पत्रिका, अंक: वर्ष 2013, स्वरूप : वार्षिक, संपादक : श्रीमती पूनम जुनेजा एवं गंगाधर सिंह सुखलाल, मूल्य : प्रकाशित नहीं, इ मेल : info@vishwahindi.com, वेवसाइट:www.vishwahindi.com, फोन : 2306761196, सम्पर्क : विश्व हिंदी सचिवालय, सिवफ्ट लेन, फारेस्ट साइट, मारीशस
    मारीशस से प्रकाशित यह वार्षिकी साहित्य व भाषा दोनों ही दृषिट से उपयोगी पत्रिका है। पत्रिका के समीक्षित अंक में जानकारीपरक, ज्ञानवर्धक व विकासोन्मुखी रचनाओं का सुंदर समन्वय है। अंक में विश्व में हिंदी के विविध आयाम के अंतर्गत संग्रह योग्य आलेखों का प्रकाशन किया गया है। इनमें शामिल हैं - विश्व मंच पर हिंदी(दामोदर खडसे), वैश्वीकरण के परिप्रेक्ष्य में समकालीन हिंदी कविता(अनुजा बेगम), वैशिवक हिंदी एक परिदृश्य(विजया सती) के आलेख शामिल किए गए हैं। अन्य प्रमुख लेखकों में अनिरूद्ध सिंह सेगर, कामता कमलेश, ताकेशि फुजिइ, गेनादी श्लोम्पेर, सुरेश चंद्र शुक्ल, संध्या सिंह, मुनीश शर्मा एवं इंद्रदेव भोला प्रमुख हैं। सभी आलेख हिंदी के वैशिवक स्वरूप से परिचय कराती है।
    विदेशों में हिंदी के पथ प्रदर्शक के अंतर्गत प्रकाशित आलेखों में हिंदी के लिए विदेशों में कार्य कर रहे विद्वानों का विवरण व उनके परिश्रम से हिंदी की दशा व दिशा का सार्थक वर्णन किया गया है। तीना जगू मोहेश, आशामोर, कुमार परिमलेंदु सिन्हा, भावना सक्सेना, राकेश कुमार दुबे, उमेश चतुर्वेदी, सत्यदेव प्रीतम प्रमुख हैं।
    तकनीक के क्षेत्रा में हिंदी के बढ़ते कदम की व्याख्या करने के लिए समीक्षित अंक में अलग से खण्ड रखा गया है। इसके अंतर्गत सूचना प्रौधोगिकी और देवनागरी लिपि(परमानंद पांचाल), तकनीकी युग में ंिहदंी का प्रचार प्रसार(ललित कुमार) एवं ंिहंदी कम्प्यूटिंग : उपलबिध और चुनौतियां(कविता वाचक्नवी) सहित एम.एल. गुप्ता एवं बालेन्दु्र शर्मा दाधीच के आलेख विशिष्ठ हैं।
    अन्य आलेखों में राजेंद्र पी. सिंह, नीरज के चतुर्वेदी, कौशल किशोर श्रीवास्तव, रणजीत साहा, अनीता गांगुली, अजय ओझा एवं रामकुमार वर्मा के आलेखों में नवीनता तथा विषयगत विविधता दिखार्इ देती है। विश्व हिंदी सम्मेलन पर रामदेव धुरंधर एवं वर्षिणी उधो सिंह के लेख ने पत्रिका को विश्व के हिंदी नव जानकारों के लिए उपयोगी बनाया है। इसके अतिरिक्त अंतर्राष्ट्रीय हिंदी कविता प्रतियोगिता2011 के विजेताओं की कविताएं प्रकाशित कर पत्रिका ने हिंदी कविता को अन्य विदेशी भाषाओं के समझ ंिहं
दी में किए जा रहे प्रयोग व परिवर्तन को सामने लाने का सफल प्रयास किया है। इस भाग में श्रीमती नीतू सिंह, वशिष्ठ कुमार झमन एवं कौशल किशोर श्रीवास्तव की कविताएं शामिल की गर्इ है। पत्रिका का स्वरूप, साज सज्जा, कलेवर तथा रचनाओं की सार्थकता इसे उपयोगी संग्रह योग्य व बनाती है एवं पठनीयता प्रदान करती है। अच्छे अंक के लिए संपादक टीम तथा विश्व हिंदी साचिवालय बधार्इ के पात्र है। 

8 comments:

  1. "गोस्वामी तुलसीदास जयंती स्थान नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी"
    वाराणसी /२२ अगस्त २०१५ गोस्वामी तुलसीदास जयंती स्थान नागरी प्रचारणी सभा में उपस्थित विद्वानो में सर्व श्रीगिरीश चन्द्र चौधरी ने अध्यक्षता की मुख्य अतिथि मॉरीशस से आये विविध किताबों कर लेखक श्री प्रह्लाद रामशरण ने कहा की तुलसी जैसा कवि उनके उपरान्त आज तक वाराणसी में नहीं
    हुआऔर न ही रामचरित्र काव्य जैसा ही लिखा गया | उन्होंने सर्व प्रथम सभी विद्वानों का स्वागत किया
    कहा कि जो विश्व में तुलसीकृत रामायण की प्रतिष्ठा है इस प्रकार का ग्रन्थ पुन: नहीं आया | ना० प्रचारणी
    सभा का मॉरीशस में काफी सम्मान है | भारत ने हमे दो बार सम्मानित किया प्रथम सन१९७५ और दुबारा
    सन२०१४ में प्रवासी भारतीय सम्मान मिला | हम भारत को धन्यवाद देते हैं | उन्होंने कहा हम अपना भविष्य बनाते हैं तो देश का भविष्य बनाते हैं और समाज का भविष्य बनाते हैं | हम एक गरीब परिवार से ही हैं दिन भर मजदूरी करना रात्रि को पढ़ना और धीरे धीरे शोध स्कॉलर बना | सन १९७४ में प्रथम पुस्तक मेरी मॉरीशस से छपी |
    मेरे हजारों पूर्वज कंधे में झोली, गांधी आश्रम वाला झोला लेकर मॉरीशस १९२३ तक गये वह सर्व प्रथम
    हस्तलिखित रामायण ,हनुमान चालीसा की प्रतियां मॉरीशस में दिये | पढ़ा -पढ़ाया | वहां भोजपुरी लोकगीत महिलाएं गातीं ,पुरुष रामलीला करते पढ़ते पढ़ाते थे | रामायण का दोहा कहने वाला दोहा कहता दूसरा उसका भावार्थ और व्याख्या करता | आदरणीय राजेन्द्र अरुण को मेरा सानिध्य मिला वह मॉरीशस में रहकर रामायण अभियान में सक्रियता से भाग लिए | तिफाक़ से एक दान दाता कर सहयोग से १९७० में भारी तादाद में गीता प्रेस से पुस्तकें मॉरीशस में घर-घर वितरित हुई | वहां एक हिन्दू फेडरेशन रामायण पर प्रतियोगिता कराता है सर्व श्रेष्ठ विजेता पुरस्कृत किए जाते हैं | मेरी माता रागिनी थी | मेरे पिता कैथ (कैथी )भाषा में लिखते थे | आज रामायण मॉरीशस कर हर घर में मिलेगा |
    इस अवसर पर सर्व श्री डा० रामअवतार पाण्डेय ,सुखमंगल सिंह ,जगदीश तिवारी ,डा ०बैज नाथ ,रामेश्वर सिंह ,डा ० शैलेन्द्र मिश्र ,डा ०ब्रजेश यादव ,सावित्री गौड़ ,बहादुर लाल ,शुभजीत साहा ,ब्रजेश चंद पाण्डेय ,श्यामसुंदर मिश्र आदि के काव्य पाठ से वातावरण काव्यमय हो गया |
    डा ० उदय प्रताप सिंह ,डा ० पवनकुमार शास्त्री ,राजेन्द्र उपाध्याय ने तुलसीदास के काव्यकृतियों पर प्रकाश डाला | संचालन डा० जितेंद्र नाथ मिश्र और धन्यवाद प्रकाशब्रजेश चंद पाण्डेय ने किया | अतिथियों का स्वागत सभाजीत शुक्ल ने किया|

    ReplyDelete
    Replies
    1. आभारी हूं कथा चक्र मारीशस की महान हिंदी पत्रिका का

      Delete
  2. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  3. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete





  4. प्रकाशनार्थ -"नवगीत का मूलस्वर व्यंग्य है "

    --"नवगीत का मूलस्वर व्यंग्य है "
    वाराणसी जुलाई १७/ प्रेमचन्द कालोनी स्थित कवि सुखमंगल सिंह के आवास पर अखिल भारतीय सद्भावना एसोसिएशन एवं समरनाथलाल स्मृति जनसेवा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में संचालित कथ्य शिल्प (कविता काव्यशाला )की ओर से 'नवगीत का अतीत और वर्तमान ' विषय पर चर्चा गोष्ठी हिन्दी के प्रगतिशील कवि सुखमंगल सिंह की अध्यक्षता में हुई | मुख्यवक्ता श्रेष्ठ नवगीतकार अजित श्रीवास्तव ने कहा नवगीत के अतीत और वर्तमान को नए सिरे से देखे जाने की आवश्यकता है | नवगीत का मूल श्वर व्यंग्य है जो आज के काव्य लेखन की मुख्य पहचान है | भोजपुरी नवगीतकार चन्द्रकांत सिंह ने कहा यदि भोजपुरी न होती तो हिन्दी की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी | भोजपुरी और खासकर काशिका के नवगीतकारों को महत्वहीन समझने के कारण ही नवगीत और नवगीतकार वह नहीं कर पा रहे हैं जो उन्हें करना चाहिए |
    अध्यक्षता कर रहे नयी कविता और नवगीत के लोकप्रिय कवि सुखमंगल सिंह ने कहा कि साठ के दशक में जहाँ ठाकुर प्रसाद सिंह ,महेंद्र शंकर जैसे जीवंत नवगीतकारों ने नवगीत को प्रतिष्ठित किया वहीं उस धारा को प्रवाहित करनें में देवेन्द्र कुमार ,गुलाब सिंह और नईम जैसे नवगीतकारों ने ही सार्थक प्रयास किया | आगे चलकर वर्तमान तक सुरेन्द्र वाचपेई , अजित श्रीवास्तव ,ओमधीरज जैसे नवगीतकारों का ही प्रमुख योगदान है | गोष्ठी में सर्वश्री प्रोफेसर अजय कुमार ,डा ० दुर्गा प्रसाद ,डा ० पूर्णिमा भारतीय ,पुष्प रंजना राय आदि ने कहा सुखमंगल जी के आवास पर आयोजित 'कथ्य शिल्प' की गोष्ठी विभिन्न विषयों पर प्रत्येक माह १७ तारीख को ही प्रेमचन्द कालोनी स्थित नयी कविता और नवगीत के श्रेष्ठ कवि सुखमंगल सिंह के आवास पर होगी |

    ReplyDelete
  5. डा ० विश्वनाथ प्रसाद नई पीढ़ी के रचनाकारों के निर्माता और प्रतिष्ठापक साहित्यकार !-सुखमंगल सिंह
    वाराणसी/अक्टूबर ०१,२०१७ डा ० विश्वनाथ प्रसाद कीर्ति शोध संस्थान की ओर से आयोजित उनकी नवी पूण्य तिथि पर अपने विचार प्रकट करते हुए वरिष्ठ समीक्षक प्रो ० श्रद्धानंद ने कहा की विश्वनाथ जी ने हिंदी की सभी विधाओं को प्रभावित करने के साथ -साथ नये रचनाकारों को संवारने और स्थापित करने का महत्वपूर्ण काम किया | वरिष्ठ कवि और समीक्षक डा ० देवी प्रसाद कुवर ने कहा की राम की आस्था की परम्परा मानने वाले विश्वनाथ जी ,समाज के विराट रूप को राममय देखते थे | चर्चित गीतकार सुरेन्द्र वाजपेयी ने कहा- विश्वनाथ प्रसाद जी जीवन के अंतिम क्षण तक अपने भावों को कागज पर उकेरने का कार्य करते रहे |इसी क्रम में डा ० अशोक कुमार सिंह ने उन्हें नई पीढ़ी का निर्माता बताया | वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु उपाध्याय
    ने बताया काशी के नये और तेजस्वी रचनाकारों के प्रेरणाश्रोत रहे |
    वरिष्ठ व्याकरण वेत्ता श्री सोभनाथ त्रिपाठी ने साहित्य के प्रत्येक कोण पर उनहोंने साधिकार कलम चलाई | अखिल भारतीय सद्भावना एसोसिएशन के अध्यक्ष कवि सुखमंगल सिंह ने कहा -डा ० विश्वनाथ प्रसाद जी
    के साथ काव्य गोष्ठियों में मुलाक़ात को साझा करने के साथ कहा कि डाक्टर साहब की सोच ने साहित्य को विश्व फलक पर पहुचाने का कार्य किया | कार्यक्रम संचालक नवगीत गौरव अजीत श्रीवास्तव ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज को खबरदार करने के साथ नई पीढ़ी के लिए कहा -डा ० विश्वनाथ प्रसाद जी ने जबरदस्त संघर्ष किया | अपर आयुक्त (प्रशासन )और वरिष्ठ गीतकार श्री ओम धीरज ने कहा - विश्वनाथ प्रसाद जी ने माटी से उपजे विचारों को ही भारतीयता मानते थे | पूर्व जनपद न्यायाधीश एवं वरिष्ठ गज़लकार श्री चन्द्रभाल सुकुमार ने मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए डा ० विश्वनाथ प्रसाद को साहित्य का सच्चा साधक बताया |
    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डा ० रामसुधार सिंह ने कहा - डा ० कि विद्यानिवास मिश्र और आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की ललित निवन्ध परम्परा की अंतिम कड़ी से डा ० विश्वनाथ प्रसाद ! प्रोफेसर सव्यसांची ने कहा कि विश्वनाथ जी के लगभग सभी शिष्य आज साहित्य जगत के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर हैं | श्री चिंतित बनारसी इन्द्रजीत तिवारी और नरेन्द्रनाथ दुबे अडिग ने डा ० साहब को एक महान साहित्यकार कहा |
    आभार प्रकाश करते हुए डा ० सीमांत प्रियदर्शी ने डा ० विश्वनाथ प्रसाद जी को २१ वीं सदी का बड़ा रचनाकार कहा |

    ReplyDelete